गरीबी। सुखी रोटी भी नसीब नहीं होती साहेब।


ग़रीबी क्या है जानना चाहोगे 
तो आओ इस ब्लॉग के जरिए आपको भी गरीबी से रूबरू कराते है।


कभी उन बच्चों को देखा है जिनके पैरों में चप्पल नहीं होती।

फिर भी वो बहुत खुश रहते है नंगे पांव मिलो दूर चल देते है।

न धूप की परवाह करते है ना काटो कि परवाह करते है।

क्योंकि उनके अपने पैरों की नहीं अपने पेट भरने की चिंता होती है।

क्योंकि उनके पास खाने के लिए बर्तन तो होते है पर उस बर्तन में खाना नहीं होता।

ये उनकी बहुत बड़ी परेशानी है भूख क्या होती है कभी महसूस किया है।

कभी उन गरीबों से पूछो भूख क्या होती है।

कभी 2 घंटे भूखे रहकर देखो भूख क्या होती है पता चलेगा।

तब उस वक्त आपको यही महशूस होगा कि हमें सुखी रोटी भी मिल जाए तो हमारा पेट भर जाएगा।

जो बचे हुए खानों को हम में फेक दिया करते है उन गरीबों को उसी खाना की तलाश रहती है।

पैरों में चप्पल नहीं होती पेट भरने के लिए खाना नहीं होता।

ठंडी हो बरसात हो उनके शरीर पर फटे पुराने घिसे पीते कपड़े होते है।

इतनी ठंड होती है और उस ठंड में हम न जाने कितनी स्वेटर मोजा अनेक प्रकार के ग्राम कपड़े पहने है।

पर वो लोग अपना सारा जीवन एक या दो कपड़ों पर बिता देते है।

क्या उन्हें ठंड नहीं लगती ?

धूप में जलते रहेंगे बारिश में भीगते रहेंगे क्या उन्हें घर की जरूरत नहीं होती। 

पहनने के लिए तन होता है पर उस तन पर कपड़े नहीं होते।

छुपाने के लिए शिर होते है पर उस शिर को छुपाने के लिए घर नहीं होते।

एक गरीब की जिंदगी क्या होती है एक गरीब ही जान सकता है ।

इसलिए कहते है आप जो भी बेवजह के पैसे खर्च करते हो उन्हीं उसे जदा खर्च न करके किसी गरीब की मदद करो।


पैर है पर उन पैरों में चप्पल नहीं होता।

बर्तन है पर उस बर्तन में खाना नहीं होता।

तन है पर उस तन पे वस्त्र नहीं होता।

इंसान है पर रहने के लिए घर नहीं होता।


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मंदिरों में तो जाकर देखो न जाने कितने भोग लगे होते है।

मजारों पे जाकर देखो तो न जाने कितने चादर लदे होते है।

कभी वो भोग का एक हिस्सा गरीबों में बाट दो।

कभी उन चादरों का एक हिस्सा उनके तन पे डाल दो।

तो उस भोग से उनका पेट भर जाएगा ।

और उस चादर से उनका तन ढक जाएगा।

🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹


भूख का एहसास उससे पूछो ।

जो एक सुबह से खाली पेट रहकर ।

दिन भर मेहनत करता है ।

और रात में उसे नसीब होती है ।

तो सिर्फ सूखी रोटी ।

और उस सुखी रोटी से भी ।

उनके पेट नहीं भरते क्योंकि ।

उस रोटी में भी लगते है चार हिस्से।






 

Comments

  1. Kya baat hai yar, kaafi achha likha hai. Lekin agar isse ek lambi kahani me convert karke likhta emotions ke sath to ho sakta hai log usse aur karib se jud paaye.

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    1. Sukriya dost btane ke liye koshish karungi...🙏

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